Monday, June 1, 2020

                 कबीर ज्ञान
   रामानंद जी के मन की बात जानना




रामानंद जी प्रतिदिन विष्णु की मानसिक मूर्ति बनाकर कर्म कांड करके पूजा करते थे। एक दिन वे भगवान विष्णु जी को स्नान कराकर मुकुट पहना दिया और गले में कंठी डालना भूल गए। मन ही मन बहुत दुखी हुए की आज पूजा ख़राब होगई।
5 वर्ष के बालक रुप में कबीर साहेब ने उनके मन की बात को जानकर रामानंद जी को कहा कि, स्वामी जी माला की गांठ खोलकर माला पहना दो, फिर गांठ लगा दो।मुकुट नहीं उतारना पड़ेगा।
रामानंद जी के मन की बात जानना
रामानंद जी प्रतिदिन विष्णु की मानसिक मूर्ति बनाकर कर्म कांड करके पूजा करते थे। एक दिन वे भगवान विष्णु जी को स्नान कराकर मुकुट पहना दिया और गले में कंठी डालना भूल गए। मन ही मन बहुत दुखी हुए की आज पूजा ख़राब होगई।
5 वर्ष के बालक रुप में कबीर साहेब ने उनके मन की बात को जानकर रामानंद जी को कहा कि, स्वामी जी माला की गांठ खोलकर माला पहना दो, फिर गांठ लगा दो।मुकुट नहीं उतारना पड़ेगा।




कबीर परमेश्वर को बालक रूप में लहरतारा तालाब पर कमल के फूल से लाकर नीरू तथा नीमा अपने घर जुलाहा मोहल्ला (कॉलोनी) में आए। जिस भी नर व नारी ने नवजात शिशु रूप में परमेश्वर कबीर जी को देखा वह देखता ही रह गया। परमेश्वर का शरीरअति सुन्दर था। आँख जैसे कमल का फूल हो, घुँघराले बाल, लम्बे हाथ। लम्बी-2 अँगुलियाँ शरीर से मानो नूर झलक रहा हो। पूरी काशी नगरी में ऐसा अद्धभुत बालक नहीं था।






600 वर्ष पूर्व कबीर परमेश्वर ने अपनी वाणियो में सृष्टि रचना का सम्पूर्ण ज्ञान बताया था, उन्होंने बताया की पहले ब्रह्म (काल) की उत्पत्ति अण्डे से हुई। फिर दुर्गा की उत्पत्ति हुई। दुर्गा के रूप पर आसक्त होकर काल ने छेड़-छाड़ की, तब कबीर जी वहाँ गए दुर्गा की रक्षा करी और काल व् दुर्गा को 21 ब्रह्माण्ड समेत 16 शंख कोस की दूरी पर भेज दिया। काल ने दुर्गा के साथ भोग-विलास किया। इन दोनों के संयोग से ब्रह्मा, विष्णु, शिव की उत्पत्ति हुई। इन्हीं तीनों की ही साधना करके सर्व प्राणी काल जाल में फंसे हैं। जब तक सतगुरु नहीं मिलेगा, पूर्ण मोक्ष होना असंभव है।



अधिक जानकारी के लिए जरूर सुने संत रामपाल जी महाराज जी के सत्संग हर रोज़ 
साधना चेनेल पर - ::- शाम - 7:30 बजे से





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