Tuesday, June 2, 2020

       कबीर जी की लीलाए

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“कबीर, बेद कतेब झूठे नहीं भाई, झूठे हैं जो समझे नाहिं।”

भावार्थ है कि चारों पवित्रा वेद ऋग्वेद - अथर्ववेद - यजुर्वेद - सामवेद तथा पवित्र चारों कतेब कुरान शरीफ - जबूर - तौरात - इंजिल गलत नहीं हैं। परन्तु जो इनको नहीं समझ पाए वे नादान हैं।

वेदों में पूर्ण परमात्मा का सम्पूर्ण वर्णन है, लेकिन तत्वज्ञान के अभाव से पंडित, ब्राह्मण, ऋषि मुनि समझ नहीं सके।

#कबीर_वाणी





600 वर्ष पूर्व कबीर परमेश्वर ने अपनी वाणियो में सृष्टि रचना का सम्पूर्ण ज्ञान बताया था, उन्होंने बताया की पहले ब्रह्म (काल) की उत्पत्ति अण्डे से हुई। फिर दुर्गा की उत्पत्ति हुई। दुर्गा के रूप पर आसक्त होकर काल ने छेड़-छाड़ की, तब कबीर जी वहाँ गए दुर्गा की रक्षा करी और काल व् दुर्गा को 21 ब्रह्माण्ड समेत 16 शंख कोस की दूरी पर भेज दिया। काल ने दुर्गा के साथ भोग-विलास किया। इन दोनों के संयोग से ब्रह्मा, विष्णु, शिव की उत्पत्ति हुई। इन्हीं तीनों की ही साधना करके सर्व प्राणी काल जाल में फंसे हैं। जब तक सतगुरु नहीं मिलेगा, पूर्ण मोक्ष होना असंभव है।






5 जून 2020 को कबीर प्रकट दिवस है, देखना ना भूले साधना चेनेल पर सुबह 9 से 12 बजे तक अनमोल सत्संग, संत रामपाल जी महाराज जी के मुखारबिंद से।।


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